कुम्भ मेला 2019: स्नान तिथियां, कुम्भ मेले का इतिहास

नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है हमारे वेबसाइट टुडे आर्टिकल पर दोस्तों आज मैं आपको बताने जा रहा हूं कुंभ मेले के बारे में मैं आज आपको कुंभ मेले की कुछ रोचक बातें बताने जा रहा हूं क्योंकि यह बातें शायद ही आपको पता होगी।

* प्रयागराज कुम्भ मेला 2019
प्रयागराज का कुंभ मेला अन्य स्थानों के कुम्भ मेले से काफी अलग है सर्वप्रथम कल्पवास की परंपरा केवल प्रयाग में है दूसरे शास्त्रों में त्रिवेणी संगम को पृथ्वी का केंद्र माना गया है स्वतंत्रता के बाद प्रयागराज कुंभ मेले में नियमों के बनने से कुंभ मेले को आयोजित करने में परिवर्तन होते गए सरकार ने कुंभ मेले में आने वाले तीर्थ यात्रियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने में काफी प्रयास किए जिससे कि आने वाले तीर्थ यात्रियों को सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था बेहतर यातायात प्रकाश व्यवस्था एवं चिकित्सा व्यवस्था जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई कुंभ मेले की व्यवस्था को बढ़ाने में नई तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है।

* स्नान दिवस. Bathing Date
जैसा की आप सभी जानते ही हैं कि कुंभ मेला तीर्थ यात्रियों का पावन तीर्थ यात्रा है कुंभ मेले में स्नान करना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है करोड़ों तीर्थयात्री और कुंभ मेले में आने वाले लोगों में स्नान जरूर करते हैं प्रयागराज कुंभ मेले में पवित्र डुबकी लगाई जाती है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि पवित्र डुबकी से मनुष्य अपने पापों को धो डालता है और मोक्ष को प्राप्त हो जाता है तीर्थयात्रियों गंगा नदी के तट पर पूजा अर्चना भी करते हैं और वह विभिन्न साधुओं के साथ सत्संग में शामिल भी होते हैं।
मकर संक्रांति :- (प्रथम शाही स्नान), 15 जनवरी 2019, मंगलवार।

पौष पूर्णिमा :- 21 जनवरी 2019, सोमवार।

मौनी अमावस्या :- (दितीय शाही स्नान), 04 फरवरी 2019,सोमवार।

बसंत पंचमी :- (तृतीय शाही स्नान), 10 फरवरी 2019,रविवार।

माघी पूर्णिमा :- 19 फरवरी 2019,मंगलवार।

महाशिवरात्रि :- 04 मार्च 2019,सोमवार।

* कुम्भ मेले का इतिहास
माना जाता है कि कुंभ मेले का इतिहास कम से कम ८५० साल पुराना है यह भी माना जाता है कि आदि शंकराचार्य ने इसकी शुरुआत की थी लेकिन कई लोगों का यह मत है कि कुंभ मेले की शुरुआत समुंद्र मंथन के आदिकाल से ही हो गई थी.
यह माना जाता है कि समुद्र मंथन से निकले अमृत का कलश हरिद्वार इलाहाबाद उज्जैन और नासिक के स्थानों पर ही गिरा था 112 साल बाद यह मेला अपने पहले स्थान पर वापस पहुंचता है जबकि कुछ दस्तावेज बताते हैं कि कुंभ मेला 525 बी सी में शुरू हुआ था कुंभ मेले का आयोजन का प्रावधान कब से है इसके बारे में विद्वानों के अनेक मत है.

* राशियों और ग्रहों से कुम्भ का सम्बन्ध 
माना जाता है कि कुंभ मेला कब और कहां लगेगा यह राशि तय करती है वर्ष 2013 में कुंभ मेला इलाहाबाद के प्रयागराज में लग रहा है ऐसा कहा जाता है कि कुंभ मेले के जो नियम है उसके अनुसार प्रयाग में कुम्भ तब लगता है जब वह माघ अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में होते हैं और गुरु मेष राशि में होता है यही संयोग 2013 में 20 फरवरी को होने जा रहा है। १९८१,२००१,२०१३ के बाद अगला महाकुंभ मेला यहां २०२५ में लगेगा।

* कुम्भ में महत्वपूर्ण ग्रह
ऐसा कहा जाता है कि कुंभ के आयोजन में नवग्रहों में से सुर्य, चंद्र, गुरु और शनि की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है इसलिए इन ग्रहों की विशेष स्थिति पर कुंभ का मेला लगता है


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